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भारत में सूचना प्रौद्योगिकी को बढ़ावा देने के लिए भारतीय भाषाओं, विशेषकर हिन्दी में विषय वस्तु का निर्माण तथा इसका वेब रुपान्तरण आज की आवश्यकता है।

इंटरनेट पर वेब पेज का निर्माण करने से पहले कुछ बातों को ध्यान रखना आवश्यक है- लिप्यान्तरण (ट्रासलेशन) सरल भाषा में किया गया हो, कठिन शब्दों का प्रयोग कम किया गया हो कभी-कभी जो व्यक्ति वेब पेज को प्रयोग में ला रहा है कठिन शब्दों के कारण सही अर्थ नहीं निकाल पाता जिससे वेब रूपान्तरण का उद्देश्य समाप्त हो जाता है।

पूरे विश्व में चीनी भाषा के बाद हिन्दी सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषा है। भारत और विदेशों में लगभग 50 करोड़ लोग हिन्दी बोलते हैं ओर इस भाषा को समझने वाले लोगों को कुल संख्या लगभग 80 करोड़ है। वर्ष 1997 में किये गये एक सर्वेक्षण से पाया गया कि 66 प्रतिशत हिन्दी बोल सकते हैं, और 77 प्रतिशत भारतीय हिन्दी को पूरे राष्ट की एक भाषा मानते हैं । भारत के 18 करोड़ से ज्यादा लोग हिन्दी को अपनी राष्ट्रभाषा मानते हैं।

यूनीकोड बहुभाषी पाठ के लिए एक 16 विट सार्वत्रिक अक्षर कोडीकरण मानक है। इसमें भारतीय भाषाओं को लिखने के लिए सभी प्रमुख लिपियों को शामिल किया गया है। भारतीय लिपियों के लिए यूनीकोड मानक इस्की-1988 संसोधन पर आधारित है और इस्की -1991 अक्षर कोडीकरण का सुपर सेट है।

यह पेज यूनीकोड़ फोंट का प्रयोग करके बनाया गया है।

वेब पेज के लिए निम्नलिखित फोंट प्रचिलित हैं, जिसमें डायनेमिक फोंट टेक्नोलोजी का प्रयोग किया जाता है, जिसमें फोंट डाउनलोड़ करने की आवश्यकता नहीं होती। यह प्रदर्श इसी का उदाहरण है, यह प्राविधि इंडिया, नई दिल्ली द्वारा बनाया गया है।

 
 

 

यह गणेश मुद्रलिपि है।

यह भीमा मुद्रलिपि है।

यह मंगल मुद्रलिपि है।

यह एरियल यूनीकोड एमएस लिपि है।

 

 
 
 
 
 
 
 
 
 
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